tag:blogger.com,1999:blog-12370525.post-1142996426132099972006-03-21T21:33:00.000-05:002006-03-21T22:00:26.146-05:00पैंसठ साल के जवानये हमारे देश की खासियत है। पैंसठ साल के बूढे अपने आप को जवान मानते हैं। नहीं तो फिर क्यों पैंसठ साल के बूढे अपने आप को युवा नेता कहलाते?<br /><br />भविष्य दिनबदिन गढ्ढे में गिरता जा रहा है। आखिर क्या किया है इन नेताओं ने भारत के लिए? शायद हम लोगों में नेतृत्व की कमी है। आपको इतिहास की किताबों में ये कोई नहीं बताएगा की हमारे राजा इतने लीचड़ और अन्यायी थे की अंग्रेजों के आने पर जनता ने राहत महसूस की। जनता ने स्वागत किया न्याय का। शायद आप ये न जानते होंगे की १८५७ में हार का असली कारण ये था की बगावतीयों ने लूटमार, और ताकत का दुरोपयोग शुरु कर दिया था। वे जनता का सहयोग खो चुके थे।<br /><br />हमें ये बड़ा गर्व है प्राचीन भारत पर। जवानों को इन भावुकता के जालों में से बचना चाहिये। ये वोही प्राचीन भारत है जहाँ पर असहाय विधवाओं को जला दिया जाता था। जहाँ शूद्र के कान में सीसा डाला जाता था वेद सुनने पर। आपका भविष्य आपका है। केवल आपका अतीत आपका है। ये हजारों सालों की मूरखता आपकी नहीं है। मूरखों के हाथ में राजनैतिक बल न जाने दें। कोई किसी परिवार का है या किसी धरम का, अगर इस कसौटी पर हम लोग ताकत इनको सौंपेंगे तो जिम्मेदार हम हैं इस लीचड़ नेतृत्व के। <br /><br />अगर आप भारत के पुराने शहरों में जाएँ तो पाएँगे हमारे असली मानसिकता। कोई एक पौधा तक लगाने के लिए तैयार नहीँ है क़ौम के लिए। जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो खूब जंगल थे। वो जंगल आज़ादी के बाद काले धन में बदल गए। जितनी रेल अंग्रेजों ने भारत में छोड़ीं, उससे शायद ५ प्रतिशत भी ज्यादा नहीं बना पाए हैं हमारे नेता। पैसा जरूर खर्च किया है। करजा जरूर लिया है। सबकी हवेलियाँ बन गईं।<br /><br />क्या बचा है जवानों के लिए? शराब से भरी थैलीयाँ और कुक्कड़। वनडे मैच। अश्लील पिक्चरें जहाँ अब लगता है गोरी चमड़ी का नाच का फैशन है। नंगी तस्वीरों से भरे अखबार।<br /><br />जवानों, ये समाज पहले से ही भ्रष्ट था, और अब और ज्यादा भ्रष्ट हो रहा है। एक तुम पर ही उम्मीद की जा सकती है। पहाड़ पर चढना हो तो पहला कदम घर की सुरक्षा से बाहर जो लिया, वो सबसे महत्वपूरण है। हर आदमी बुद्ध नहीं बन सकता। हर आदमी अमिताभ नहीं बन सकता। लेकिन हम अपनी तरफ से कहीं कोई बदलाव ला सकते हैं। हर पेड़ की शुरुआत कहीं किसी बीज से हुई थी। धरम का मतलब आँख मूँद के बैठ जाना नहीं है। ये सबको मालूम है क्या सही है क्या गलत है। अब इसको बाहर भी चमकने का मौका मिले। तब ये भारत गर्व करने लायक होगा। मूरख अतीत का गर्व करते हैं। बुद्धिमान लोग वर्तमान को कर्म से चमकाते हैं। <br /><br />अगर युवाओं को भविष्य उजाला करना हो तो राजनीति में उतरना पड़ेगा। अगर दस साल बाद आप आम खाना चाहते हैं तो गुठली किसी को तो बोनी ही पड़ेगी। अपने गाँव कसबों में, जहाँ हो सके राजनीति में उतर जाओ और ईमानदारी के वातावरण की माँग करो। अकेले हीरो बनने की कोई जरूरत नहीं है समूह में ताकत होती है। बूंड बूंद से घड़ा भर जाता है। नेताओं को लगना चाहिये की जनता की नजर उन पर है। जब बुद्धिमान लोग, जवान लोग, संवेदनशील लोग समाज में रुचि लेना शुरु करेंगे तो धीरे धीरे ये रामराज बन जाएगा, नहीं तो ये नरक बन जाएगा। और कोई रास्ता नहीं।<div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/12370525-114299642613209997?l=jaihanumanji.blogspot.com'/></div>jai hanumanhttp://www.blogger.com/profile/12333747248023611898noreply@blogger.com6