26 November 2008

आखिर कब तक चुप रहोगे

ये अजीब देश है हमारा। २० लाख से ज्यादा की सेना है। लाखों पुलिस वाले हैं। लेकिन फिर भी दिन दहाड़े आतंक हो जाता है।

मामला ये नहीं कि आतंक को कैसे रोका जाए। अगर कोई हमसे इतना चिढता है कि मारने के लिए खुद मरने को तय्यार है तो मुश्किल है।

मामला ये है कि इतना सब होने के बाद कोई जवाब क्यों नहीं दे पाता भारत। अगर इन लोगों के अड्डों पर धावा बोल दिया जाए, इनके परिवार, गाँव वगैरह को कीमत चुकानी पड़े तो अगली बार वो सोचेगा।

मामला ये है कि भारत का खून ठंडा पड़ गया है। अब मन वनडे और रियलटी शो में ज्यादा लगता है। अब रंगीन कपड़े पहने कूदते हुए नचकय्यों मे ज्यादा ध्यान है।

मामला ये है कि अब इन बूढों के बस का कुछ नहीं है। अब नया खून चाहिए। अब नया तेज चाहिए। अब इन बूढे नेताओं को इस्तीफा दे देना चाहिए।

भारत भ्रष्ट हो चुका है। भ्रष्टता में कोई दम नहीं। भ्रष्ट का कोई आदर नहीं। भ्रष्ट का कोई भविष्य नहीं।

जवानों, जागो।

3 comments:

Sanjeev said...

इस कारनामे में भी हिंदू आतंकवादियों का हाथ है बेचारे मुसलमानों को तो नाहक बदनाम किया जा रहा है।

jai hanuman said...

मुसलमानों का मुद्दा नहीं है। ये भारत के नपुंसक नेतृत्व का नतीजा है।

Ummed Singh Baid "Saadhak " said...

भ्रष्ट-तन्त्र का दंश ही, भुगत रहा है देश.
बार-बार दोहरा रहा, फ़िर क्यों सोया देश.
फ़िर क्यों सोया देश,उठे मारे दुश्मन को.
मग्र है मुश्किल, कैसे पहचाने दुश्मन को?
कह साधक इस देश का मालिक राम-वंश ही.
क्यों भुगते फ़िर देश, रावणी-तन्त्र का दण्श ही?