29 August 2006

धरमेंदर का तकिया कलाम

हम लोग मजाक बनाते थे कि धरमेंदर के आने पर शहर के सारे कुत्ते भाग जाया करते हैं। क्योंकि हर पिक्चर में वो बार बार "साले कुत्ते, तेरा खूऽऽन पी जाऊँगा" रटता रहता था।

अमरीका में दोस्ती करनी बहुत मुश्किल है। यहाँ आदमी पैसे, कर्जे, होड़, और प्रतिस्पर्द्धा के बुखार से बावरा है। और भी बुखार हैं, उनके बारे में बात ना ही की जाए तो बेहतर। सुना है भारत भी उसी दशा में जल्दी से जल्दी पहुँचने की कोशिश में है। आशा है भारत की यात्रा उस मंज़िल पर नहीं ले जाएग जहाँ अमरीका पहुँचा। क्योंकि जब एक आदमी दूसरे को केवल दुख, प्रतिस्पर्द्धा का, स्रोत देखता है तो फिर दोस्ती मुश्किल है। आदमी अकेला पड़ जाएगा, और भी दुखी हो जाएगा। शायद इसका नतीजा है की अमरीका में मानसिक रोग शायद दुनिया में सबसे ज्यादा होते हैं।

अब यहाँ दोस्ती करनी मुश्किल है, उसका नतीजा बच्चे को झेलना पड़ता है। उनकी भी दोस्ती नहीं हो पातीं, और उसका नतीजा यहाँ बच्चों की आपराधिक टोलियाँ बन जाती हैं। और सच तो यह है जिस तरह का यहाँ चाल चलन है अमरीकी बच्चों का, हम लोग अपने बच्चों को दूसरे देसी परिवारों के बच्चों से ही दोस्ती करने देते हैं।

तो हमारा नौ साल का छोटू बहुत कम हिंदी जानता है। देसी समुदाय के बच्चों के साथ खेलता है। एक दिन घर आया और मुझे पूछता है "डैड, वॉट इज़ द मीनिंग ऑफ 'साले कुत्ते'" ।

10 comments:

आलोक said...

:)

Ashish Gupta said...

Apane apna answer to bataya hi nahi!

anil sharma said...

कितना सुन्दर चित्रन किया है आपने दोस्ती का.वाकए मै आज भारत मै भी दोस्ती को पाना आसान नही है.बच्चे कितने भोले होते है ये साबित कर दिया आपके सुपुत्र ने.

अनिल शर्मा

divyabh said...

hi, i have visited ur blog its really nice and the idea behind this is great to learn.desh chahe kitna hi uchaa kyu na chlaa jaye usaki asliyat hamesha takhatoo ke piche hoti hai.thanku 4 your visit do come and comment.

Anonymous said...

यह जो आपने इस प्रविष्ति मे लिखा है यह पूरा का पूरा मेरी स्वयं की कहानी है। ज्यादा विस्तार मे नहीं जाऊँगा किन्तु मैं खुद अमेरिका की इस संस्कृति का भुक्त-भोगी हूं।

आभार,
र ।

rajneesh.joshi@gmail.com
http://web.syr.edu/~rcjoshi

Anonymous said...

भाई आपने बलौग लिखना क्यों बंद कर दिया । आज कल आप क्या लिख रहे हैं ?

sandeep said...

क्या आप ही तख्ती नामक साँफ्टवेअर के रचियता हैं ?

Aditya said...

I really liked ur post, thanks for sharing. Keep writing. I discovered a good site for bloggers check out this www.blogadda.com, you can submit your blog there, you can get more auidence.

Anonymous said...

Its an nicely written blog. I really appriciate your view.

''ANYONAASTI '' said...

Aap ki aashankaa sach ho chuki hai , is maamale men Bharat Amerikaa se bhi aage nikal rahaa hai. Kaalonee sanskriti badh rahii hai ,Mohallaa sanskriti khatam ho rahii hai|