05 August 2006

ये तो अच्छा हुआ अंगूर को बेटा न हुआ

जब आप किसी नई जगह जाते हैं तो आपकी नज़र वो देखती है जो आँखों के सामने तो है मगर अब लोगों का ध्यान नहीं खींचतीं। ये ६ साल पुरानी बात है अब तो भारत काफी तरक्की पर है, अमरीका वालों को अंग्रेजी में पछाड़ रहा है। उस समय नया नया उत्तर प्रदेश सरकार ने हल्की शराब बेचने की छूट दी थी।

एक बार मैं मेरठ जा रहा था, गलत बस में चढ़ गया और मोदीनगर के पास किसी कस्बे में उसका आखरी पड़ाव था, वहाँ मुझे उतरना पड़ा। गरमी बहुत थी अगली बस का कुछ पता नहीं चल रहा था। प्यास लगी थी।

सड़क के साथ दुकान थी वहाँ लिखा था "यहाँ ठंडी बीर मिलती है।"

2 Comments:

Anonymous SHUAIB said...

तो किया आपने वोह ठंडि बीर पी?

ज़िद ना कर आज तो पीले
मैकदा है ये कोई धर्मशाला नही

August 06, 2006 12:16 PM  
Blogger gobbs said...

maafi chahunga but meko beer samajh nahi aya kripya karke meko samjha dein coz meko lagta hai iis joke mein ras hai to i dnt wanna miss.hw can i also type in hindi?? can u gv me hindi font??

September 15, 2007 3:12 PM  

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