13 July 2006

वसो मेरे हिरदै

कर किरपा वसो मेरै हिरदै
होई सहाई आप ॥
सुणि सुणि नाम तुम्हारा
प्रीतम प्रभु का चाव ॥
- श्री गुरु ग्रंथ साहिब

वस जाओ मेरे हिरदय, और क्या आशीरवाद माँगू ....मेरे ही नहीं औरों के हिरदय भी.... पा सकें गुरु किरपा से हम सरब पियार... मिल सकें हम उनसे जो दिखा सकें हमें सही ध्यान विचार...


सतुगुरु पूरा जे मिलै पाईयै रतन विचार ॥
मन दीजै गुरु आपणा पाईयै सरब पियार ॥
- श्री गुरु ग्रंथ साहिब

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