असली दुख वो नहीं जो बुराई लोगों ने हमारे साथ करी। असली दुख वो है जो मूरखता में पड़कर बुराईयाँ हमने करीं। क्योंकि हम ये जानते थे कि हमारे पास चुनाव था। वो न करने को। कोई कितना भी बड़ा मूरख, पापी, नीच क्यों न हो। उसके अन्दर वोही विवेक है जो संत के अन्दर है। उसके पास आज़ादी है मूरखता करने या न करने को। कोई मूरख नहीं यहाँ। सब सयाने हैँ। सब अपना भला चाहते ही हैँ। उस भले को पहुँचने के रस्ते में कुछ भूल हो गयी किसी से। वो ठीक भी हो सकती है। जीवन के अवसर हमारे हाथ में नहीं हैं। ये पिक्चर हमनें नहीं लिखी। ये भयानक न हो।
परमात्मा हमें सद्बुद्धि दे।
परमात्मा हमें सही से गलत जानने का विवेक दे।
परमात्मा हमें सही रस्ते पर चलने का आत्मविशवास दे।
परमात्मा हमें भली संगत से मिलाए।
परमात्मा हमें गुमराह लोगों से दूर रखे।
परमात्मा हमें जीवन में शुभ अवसर दे।
परमात्मा हमें जीवन में ज्यादा आराम न दे।
परमात्मा हमें जीवन में ज्यादा कठिनाई न दे।
परमात्मा हमें जीवन में कुण्ठाओं में न फँसने दे।
परमात्मा हमारे जीवन को वैकुण्ठ बनने दे।
परमात्मा हमें ये वैकुण्ठ सबको बाँटने के अवसर दे।
07 May 2006
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5 comments:
परमात्मा हमें सही रस्ते पर चलने का आत्मविशवास दे।
सही है। अक्सर हमें सही रास्ता पता होता है लेकिन उस पर चलने का विश्वास नहीं होता।
ईश्वर आपके साथ रहे, हनुमान जी.
जय बजरंग बली
आपकी अध्यात्मिक सो च पर बधाई । सही रास्ता कठिनाईयों से भरा है और कठिन जीवन बहुत कम लोग चाहते है।
Jai Bajrangbali
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