19 March 2006

वो अब भी हमारे साथ है

एक बार मैं रेल में दफ्तर से घर जा रहा था। उन दिनों काम की वजह से काफी परेशान था। अमरीका के खटारा "ह" वीसा में फँस के, अच्छे खासे कैरियर को चौपट करके, अनजान लोगों के चंगुल में फँस के, दफ्तर की नेतागिरी में रौंदे जाने पर अपनी किस्मत को कोस रहा था।

मन में विचार उठा " हे परमात्मा ये मैं कहाँ फँस गया, कुछ मदद करो, कुछ हौसला बढाओ, कोई इशारा भेजो"।

एक आदमी बगल में बैठा था, वो उठा और सामने से निकल गया।

उसने जैकेट पहनी थी। उसकी पीठ पे लिखा था "गॉड इज़ विद यू ईवन नाओ"।

3 Comments:

Blogger Raviratlami said...

तो, क्या गॉड वाज़ विद यू दैट डे? एन्ड इज़ ही विद यू इवन नाओ?

March 20, 2006 12:29 AM  
Blogger Pratik said...

शायद भगवान आपकी परीक्षा ले रहा है। वह अपने भक्तों की बहुत कठिन परीक्षा लेता है। भक्त न होना बढिया है। :-)

March 20, 2006 10:11 AM  
Anonymous Tarun said...

प्रतीक बहुत सही बात कही है

March 20, 2006 11:34 AM  

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