वो अब भी हमारे साथ है
एक बार मैं रेल में दफ्तर से घर जा रहा था। उन दिनों काम की वजह से काफी परेशान था। अमरीका के खटारा "ह" वीसा में फँस के, अच्छे खासे कैरियर को चौपट करके, अनजान लोगों के चंगुल में फँस के, दफ्तर की नेतागिरी में रौंदे जाने पर अपनी किस्मत को कोस रहा था।
मन में विचार उठा " हे परमात्मा ये मैं कहाँ फँस गया, कुछ मदद करो, कुछ हौसला बढाओ, कोई इशारा भेजो"।
एक आदमी बगल में बैठा था, वो उठा और सामने से निकल गया।
उसने जैकेट पहनी थी। उसकी पीठ पे लिखा था "गॉड इज़ विद यू ईवन नाओ"।
मन में विचार उठा " हे परमात्मा ये मैं कहाँ फँस गया, कुछ मदद करो, कुछ हौसला बढाओ, कोई इशारा भेजो"।
एक आदमी बगल में बैठा था, वो उठा और सामने से निकल गया।
उसने जैकेट पहनी थी। उसकी पीठ पे लिखा था "गॉड इज़ विद यू ईवन नाओ"।

3 Comments:
तो, क्या गॉड वाज़ विद यू दैट डे? एन्ड इज़ ही विद यू इवन नाओ?
शायद भगवान आपकी परीक्षा ले रहा है। वह अपने भक्तों की बहुत कठिन परीक्षा लेता है। भक्त न होना बढिया है। :-)
प्रतीक बहुत सही बात कही है
Post a Comment
<< Home